संदेश

मेरी वाली दुनिया

कुछ दिन हुए एक ख़ून हो गया एक लड़के ने अपनी गर्ल फ्रेंड को मार दिया जी-जी पता है ऐसे हज़ारों क़िस्से हो चुके हैं कुछ प्रेम सम्बन्ध कुछ समय तक चलते हैं  कुछ ज़्यादा लम्बे भी चल जाते हैं  पर एक सीमा के बाद हर लड़की शादी चाहती है अपना परिवार चाहती है जो कि सही भी है  पर लड़का तैयार नहीं होता  ऐसे हालातों में विदाई देने की प्रथा बन चुकी है  वो... शादी से पहले वाली विदाई  जी ये सब भी सबको पता है  कोई नई बात नहीं है बार-बार एक-सी कहानी पढ़-पढ़ के  आख़िर आदत पड़ ही गयी थी कहानी वही होती है  सिर्फ़ कलाकारों के नाम अलग होते हैं  शहरों और गांवों के नाम भी अलग होते हैं  एक जैसे कथानक से फ़िल्में बोरिंग लगने लगती हैं  मुझे भी इस तरह के समाचारों से दर्द होना बंद हो गया था आँसुंओं का बहना रुक गया था पर ये... ये क़िस्सा तनिक हट के निकला  तनिक नहीं, काफी हट के जिस तरह उस लड़की की विदाई हुई... तौबा क्या मैं किसी दूसरे जहान में पहुँच गया हूँ  क्या ये सब इसलिए किया गया क्योंकि मुझे दर्द नहीं होता था? देखते देखते वक़्त कितना बदल गया! दुनिया कितनी बदल गयी  इतनी दहशत! इतनी आसानी से? आप जो भी कहना चाहें, कहें  पर मैं अब इस

हिम्मत

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हिम्मत भी क्या चीज़ है  ये इंसान को कुछ करने के लिए उकसाती है  कुछ अलग, कुछ नया, रोमांचक ऐसा कुछ, जो करने से वो डरता रहा है  घबराता रहा है  उसे ग़ैरज़रूरी बनाता रहा है  भले ही वो चीज़ उसके मतलब की हो  शायद ज़रुरत की भी हो  पर आड़े आ जाती हैं दिमाग़ी कमज़ोरियां, आम रुकावटें वैसी ही जैसी हर नुक्कड़ पर दिख जाती हैं; 'शायद नहीं हो पायेगा अब इतना ज़रूरी भी तो नहीं  लाखों लोग इसके बग़ैर जी ही रहे हैं ना  उनमें मैं भी और सही' - इत्यादि अब एक हीरे को हासिल करने में ऐसी रुकावटें तो आएंगी ही हीरा आख़िर हीरा है  हीरा आपके अंदर की बात है  अंदर छुपी हुई इच्छाएं और कामनाएं हैं  ये अंदर की बातें हीरे-मोतियों से कम नहीं होतीं  बाहर की बातें और आदतें तो सबको पता हैं  वो दिखाई देती हैं  इसलिए वो साधारण हैं  पर जो अंदर है वो क़ीमती है  वो वर्षों पुरानी उग्र इच्छाएं हो सकती हैं दबी हुई गहरी हसरतें, अभिलाषाएं हो सकती हैं   कहते  हैं ना   बंद मुट्ठी सवा लाख की  खुली तो प्यारे ख़ाक की  तो जिसने हिम्मत करके हीरे की तरफ क़दम बढ़ाया, उसका मूल्य बढ़ गया  चाहे वो हीरा एक नया विचार हो  कोई नायाब हुनर हो, एक नई तरकीब हो,  न

कौन हो

कौन हो भाई ? इतने धीमे से आकर खड़े हो गए ... हमारे पीछे  हमें तो ये भी नहीं पता कि  पुरुष हो या महिला  बड़े हो या अभी बच्चे ही हो पर... जाने क्यों तुम्हारे पैरों की आहट से मन को एक अजीब सी शांति मिली है  जैसे सुकून की हवा एक झोंका मेरे कमरे में आ गया हो  और उसने मेरे पर्दों  मेरे बालों, मेरे पौधों  सबको नयी ज़िन्दगी दे दी  नयी ख़ुशी दे दी  एक अरसा हो गया था कि बिना मांगे, या ढूंढें कुछ अच्छा मिल जाये बताना चाहोगे, कौन हो तुम ?

कुछ अनमोल पल

एहसास की रोशनी एकाएक एक दिन कर गयी रोशन  इस दिल के कुछ ख़ाली अँधेरे खाने  पुरानी बंद किताब के पन्ने  कुछ अजीब लगा  बहुत सारी पुरानी चीज़ें  चेहरे, लोग, बातचीत एक नया शहर नया घर नया कमरा  नई ज़िन्दगी,  नई  नौकरी,  नई  बेकारी हाँ नए परिवार में चंद पुराने दोस्तों ने माहौल बदल दिया  हाथ मिलाना गले लगना शोर मचाना  "अरे तुम भी! यहाँ?  वाह मज़ा आ गया।" इतना जाना पहचाना तहलका जैसे बीच समुद्र एक हरा भरा द्वीप मिल गया हो  मेहमान  अभी कमरे के दरवाज़े पर ही था  अंदर संदूक रखने का भी मौका नहीं मिला  था  शोर  भी  बंद नहीं हुआ था उस परिवार के साधारण से लोग चारों ओर खड़े थे  इस हंगामे को मज़े लेकर देख रहे थे  भरा पूरा परिवार था  बा थीं तीन बच्चे और मम्मी पापा  कुछ मुस्करा रहे थे कुछ हंस रहे थे  बा को ये सब पागलपन लग रहा था एक लम्बी सी  निक्क र  पहने  उनका नौकर    हाथ से अपना मुंह छुपा रहा था  इन सबसे अलग सफ़ेद फ्रॉक में एक बच्ची थी  भावरहित चुप और शांत उसका दांया कन्धा दीवार पर टिका था  पर उसकी बड़ी बड़ी गोल आँखें  मेहमान पर टिकी थीं  मेहमान ने एक सरसरी सी नज़र उस पर डाली  और देखा कि उसकी मासूम निगाहें

एक ख्वाहिश ऐसी

हज़ारों ख्वाहिशें ऐसी, ऐसी ऐसी, ऐसी ऐसी कि पूछो मत कैसी कैसी बेहद अजीब हों जैसी बिल्कुल नामुमकिन हों वैसी कभी कभी तो  मुझे  लगता है  मैंने कहां से ढूंढी ख्वाहिशें ऐसी मैंने किससे सीखा ये मांगो वो मांगो ये रहने दो, ये कुछ खास नहीं ये तो आसान है इसकी कोई कीमत नहीं आसान ख्वाहिश की ख्वाहिश भी, ख्वाहिश कैसी तो मैंने सोचा  कि सोचा जाये किसी  ऐसी  मुश्किल ख्वाहिश के बारे में  ऐसी मुश्किल जिसे किसी ने  नहीं  सुलझाया हो, वैसी  ऐसी मुश्किल जिसका ख्याल ही किसी को नहीं आया हो  काम मुश्किल था  तो मैंने सोचना शुरू किया बल्कि सोचने का सिलसिला शुरू किया ऐसी एक चीज़, सिर्फ़ एक मुश्किल  जो इतनी मुश्क़िल हो, इतनी मुश्क़िल हो कि उसकी ख्वाहिश से ही दम निकल जाये   बरसों की मेहनत के बाद मुझे  मिल ही गया  वो ख्याल कि किसी ऐसी चीज़ ख्वाहिश करो जो दिखाई दे पर मिल न सके सामने हो पर उसे छुआ  ना जा सके कहानी कुछ चाँद सितारों जैसी ये दिखाई देते हैं, बस  बस इतना ही उसके आगे कुछ नहीं  देखिए और खुश रहिये चलिए 'दोस्त' मुश्किल थोड़ी आसान कर देते हैं  हज़ारों लफ्ज़ मिटा देते हैं जी मेरा मतलब है ये लफ्ज़ 'हज़ारों' हट

छाया की क्षमता

दरवाज़ा खुला, फर्श पर एक छाया खड़ी थी खड़ी? खड़ी नहीं पड़ी थी मेरा मतलब छाया फर्श पर थी कुछ देर वो वहीं रुकी वो छाया फिर आहिस्ता से हिली और दूसरे कमरे की तरफ चली वहां रुकी छाया का सिर हल्का सा इधर-उधर घूमा वो कुछ देख रही थी या भांप रही थी थोड़ी देर में छाया की बाहें हिलीं फिर इधर उधर घूमने लगीं पहले ज़रा आराम से फिर ज़ोर से थोड़ी देर में वो रुक गयीं अब उसका सर एक तरफ मुड़ा फिर दूसरी तरफ फिर ये सिलसिला शुरू हो गया दाएं बाएं ऊपर नीचे फिर गोल गोल चारों ओर अब सब शांत हो गया शायद ये काम ख़तम हो गया होगा छाया के हाथ कमर पर रुक गए फिर वो एक तरफ मुड़ी और कुछ जांचा फिर दूसरी तरफ उसने देखा कि और किस किस की छाया वहां हैं एक छाया टेबल की है दो कुर्सियां भी हैं अपनी अपनी छाया के साथ छाया ने इन छायाओं के बीच की जगह को परखा सोचा काफी जगह है और धीरे धीरे टहलना शुरू किया पहले ज़रा संभल के आहिस्ता आहिस्ता फिर तेज़ और तेज़ कई मिनट टहलने के बाद एक अजीब बात हुई काफी अजीब हुआ ये के छाया पर पानी कुछ बूँदें आ गिरीं पर उन बूंदों की कोई छाया नहीं थी अगर होगी भी  शायद, तो उस वक़्त जब वो ऊपर से नीचे गिर रही होंगी अब छाया कैसे सो

एक चीज़ छोटी सी

क्या दिखता है  क्या क्या दिखता है  आँखें खुली हैं इसलिए जो है सो दिखता है  पेड़ हैं घर हैं लोग हैं  कौवे गौरैय्या कुत्ते भी हैं  लोग आ जा रहे हैं  बतिया रहे हैं  सिगरेट पी रहे हैं  जला रहे हैं, बुझा रहे हैं  दुकानदार पैसे ले रहा है  वापस कर रहा है  पैसे कमा रहा है  उसके पास डबल रोटी अंडे  टॉफी चिप्स और बिस्किट भी हैं  वो तम्बाकू वाले मावा के पैकेट भी रखता है  कई लोगों को हाथ का बनाया मावा पसंद है  उसपे कोई घिनौनी फोटो नहीं होती सस्ता भी है और फ्रेश भी  उसके हाथ काफी जल्दी जल्दी चल रहे हैं  दो लोग और लाइन में खड़े हैं  पैकेट लेकर लोग जा रहे हैं  नए आ रहे हैं  रेज़गारी डिब्बे में जा रही है  नोट कहीं और डाले जा रहे हैं  ये मावा हर कोई नहीं खा सकता  सिर्फ वो ही जिन्हें इसके नशे की ज़रुरत हो  या लत हो  सिगरेट के पैकेट पर एक खतरनाक चित्र है  मैं उसे देख नहीं सकता  शायद उल्टी हो जाएगी  मन परेशान हो जायेगा  पर कोई बात नहीं  ऐसा पैकेट मेरे हाथ में नहीं है  पैकेट वाला भयानक चित्र चेतावनी देता है   कि तम्बाकू खाने वाले कैंसर के शिकार हो सकते हैं  कुछ कहा नहीं जा सकता कि ऐसा होता ही है  या हो ही नहीं

अरज है इतनी

अरज है इतनी दरस दिखाओ  ... यहाँ आओ या वहां आओ  घर पे या बाहर ही आओ  बताओ कब आओगे  और फिर वादा निभाओ  कितने दिन हो गए  हाँ हाँ करते यहाँ वहां करते  आज नहीं कल करते  अभी नहीं फिर कभी कहते  ज़माने की फिकर है तुमको तुमसे बहुत काम होगा सबको  कभी मेरा भी कोई काम कर जाओ  अब दोस्ती एक तरफ़ा तो नहीं हो सकती  तुम्हारा नाम अच्छे लोगों में शामिल है  क्योंकि तुम सबकी मदद करते हो  पर क्योंकि उन सब में मैं शामिल नहीं हूँ  इसलिए उन सबको 'सब' नहीं कहा जा सकता  कभी सोचा है इसके बारे में  शायद तुम बड़ा सोचते हो  जहाँ सब शामिल हों वो बड़ा हो गया  पर मुझे भी शामिल करने से  वो कुछ ज़्यादा बड़ा हो जायेगा  और तुम उसे संभाल नहीं पाओगे  या मैं उसकी कीमत कम कर दूंगा  शायद मैं कुछ ज़यादा ही अक्ल लगा बैठा  खैर फिर भी  हो सके तो आओ दरस दिखाओ  अरज तो इतनी ही थी

जो था सो था

एक समय था वो काफी पहले था मैं जैसा हूँ वैसा नहीं था बहुत छोटा था छोटे तो सभी होते हैं काफी पहले जब वो होते हैं उस वक़्त मुझे पता नहीं था कि क्या पता होना चाहिए था तब धीरे धीरे पता चल रहा था क्या ज़रूरी था क्या नहीं था क्या कुछ ऐसा था जो उस वक़्त ज़रूरी था पर बाद में नहीं होने वाला था और बहुत कुछ ऐसा था जो समझ में नहीं आता था पर ज़रूरी लगता था शायद बाद में उसकी ज़रुरत पड़ने वाली थी पर पक्का नहीं था कि किसी चीज़ की ज़रूरत बाद में पड़ेगी कितनी बाद में कुछ दिनों में महीनों में या बरसों में इतना सोचना नहीं आता था वक़्त ऐसे ही गुज़र रहा था कई ग़ैर ज़रूरी चीज़ें चंद ग़ैर ज़रूरी काम ज़मीन पर बैठ कर सब जूतों के फीते खोलना फिर डाल देना कितना वक़्त होता था पर मुझे पता ही नहीं था कि मेरा दिल और दिमाग़ जो करना चाहता था वो क्या था  क्या हो सकता था अगर वो सामने आता तो..  तो मैं उसे पहचान सकता था  पर उस जैसा कुछ कहीं नहीं था कोई बताने वाला भी नहीं था मन में कोई नाराज़गी खिन्ननता या उदासी नहीं थी मैं ख़ुश भी नहीं था